January 27, 2022

बागेश्वर में उत्तरायणी मेला नहीं होने से लोग निराश


बागेश्वर। तीन महीने की तैयारी के बाद अंत समय में उत्तरायणी मेला स्थगित होने से लोग निराश हैं। कपकोट तहसील के मिकिला खलपट्टा से लोग रिंगाल के बने बस्तुओं और भोटिया प्रजाति के कुत्ते लेकर पहुंच गए हैं। इसके अलावा कई बाहरी क्षेत्र से दुकानदार भी यहां आ गए हैं, जबकि प्रशासन ने कोरोना गाइड लाइन का पालन करते हुए सिर्फ जनेऊ संस्कार तथा मुंडन संस्कार तथा गंगा स्नान की ही अनुमति दी है। मालूम हो कि नवंबर में मेले की तैयारी को लेकर पहली बैठक जिलाधिकारी की अध्यक्षता में हुई। इसके बाद नगर में रंग-रोगन व पैदल पुलों का निर्माण हुआ। इसके बाद दिसंबर में ओमीक्रॉन के मामले बढ़ने लगे तो प्रशासन ने तीन दिन का मेला कराने का निर्णय लिया। इसमें स्थानीय उत्पाद तथा स्थानीय कलाकारों को मंच देने की बात की। जब मामले और बढ़े तो मेला निरस्त करने का निर्णय ले लिया। लेकिन मेला इतना प्रसिद्ध है कि दूर-दरातके लोग आने लगे हैं। कपकोट तहसील के मिकिला खलपट्टा, रातिरकेटी, पतियासार से लोग रिंगाल के सूपे आदि लेकर पहुंच गए हैं। कुछ लोग भोटिया प्रजाति के कुत्ते भी लेकर आए हैं। उत्तरायणी में यह कुत्ते सबसे अधिक बिकते हैं। अब मेला नहीं होने से लोग निराश हैं। तारा राम, कृपाल राम, चंचल राम तथा भानुली देवी का कहना है कि तीन दिन रहेंगे नहीं बिके तो वापस अपने गांव चले जाएंगे। शुक्रवार को मकर संक्रांति पर जनेऊ संस्कार, मुंडन तथा गंगा स्नान होगा। उपजिलाधिकारी हरगिरी ने बताया कि धार्मिक कार्यक्रमों में कोविड के नियमों का पालन हर हाल में करना होगा। लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ कार्रवाई भी होगी।