May 17, 2022

उमरान को अभी और परिपक्व होने की ज़रूरत है : शमी

उमरान को अभी और परिपक्व होने की ज़रूरत है : शमी
मुम्बई ,14 मई । गुजरात टाइटंस के तेज़ गेंदबाज़ मोहम्मद शमी ने कहा है कि वह सनराइज़र्स हैदराबाद के युवा तेज़ गेंदबाज़ उमरान मलिक की तेज़ी से प्रभावित तो ज़रूर हैं, लेकिन उन्हें अभी और मेहनत करने की ज़रूरत है।
शमी ने एक प्रेस वार्ता में पत्रकारों से बात करते हुए कहा, मैं व्यक्तिगत रूप से पेस का बहुत बड़ा फ़ैन नहीं हूं। पेस होना सही है लेकिन अगर आप 140 (किमी प्रति घंटा) की गति से भी दोनों तरफ़ गेंद को स्विंग करा सकते हैं, तो वह किभी भी बल्लेबाज़ को परेशान करने के लिए काफ़ी होता है। इसलिए मैं कहूंगा कि अभी उमरान मलिक को परिपक्व होने में थोड़ा सा समय है। उसके पास गति ज़रूर है, लेकिन जैसे-जैसे वह मैच खेलता जाएगा, वह गति के साथ गेंदबाज़ी के लिए ज़रूरी अन्य चीज़ों को भी सीखता जाएगा।
शमी इस आईपीएल से निकल रही भारतीय युवा तेज़ गेंदबाज़ों की पीढ़ी से भी प्रभावित दिखे। उन्होंने कहा, यह बहुत अच्छी बात है कि इस सीजऩ में कई युवा भारतीय तेज़ गेंदबाज़ पूरे आत्मविश्वास के साथ गेंदबाज़ी कर रहे हैं और कमाल का प्रदर्शन दे रहे हैं। एक तेज़ गेंदबाज़ के रूप में लगातार बेहतर होने के लिए आपको प्रतिभा के साथ-साथ मैच प्रैक्टिस भी चाहिए होती है। इस आईपीएल से इन युवा तेज़ गेंदबाज़ों को वह मैच प्रैक्टिस मिल रही है। वे सीनियर्स के साथ समय बिता रहे हैं और उनके अनुभवों से भी सीख रहे हैं।इस दौरान उन्होंने गुजरात के यश दयाल और साथ में अभ्यास कर चुके लखनऊ सुपर जायंट्स के मोहसिन ख़ान की भी तारीफ़ की।
ख़ुद के प्रदर्शन और सफ़ेद गेंद क्रिकेट में अपने भविष्य के बारे में बात करते हुए शमी ने कहा, जब-जब मुझे सफ़ेद गेंद की क्रिकेट में मौक़ा मिला है मैंने अपना 100 प्रतिशत देने की कोशिश की है और मैं सफल भी हुआ हूं। पिछले तीन-चार आईपीएल सीजऩ से मैं सबसे अधिक विकेट लेने वाले गेंदबाज़ों में से हूं। (किमी प्रति घंटा) की गति से भी दोनों तरफ़ गेंद को स्विंग करा सकते हैं, तो वह किभी भी बल्लेबाज़ को परेशान करने के लिए काफ़ी होता है। इसलिए मैं कहूंगा कि अभी उमरान मलिक को परिपक्व होने में थोड़ा सा समय है। उसके पास गति ज़रूर है, लेकिन जैसे-जैसे वह मैच खेलता जाएगा, वह गति के साथ गेंदबाज़ी के लिए ज़रूरी अन्य चीज़ों को भी सीखता जाएगा।
शमी इस आईपीएल से निकल रही भारतीय युवा तेज़ गेंदबाज़ों की पीढ़ी से भी प्रभावित दिखे। उन्होंने कहा, यह बहुत अच्छी बात है कि इस सीजऩ में कई युवा भारतीय तेज़ गेंदबाज़ पूरे आत्मविश्वास के साथ गेंदबाज़ी कर रहे हैं और कमाल का प्रदर्शन दे रहे हैं। एक तेज़ गेंदबाज़ के रूप में लगातार बेहतर होने के लिए आपको प्रतिभा के साथ-साथ मैच प्रैक्टिस भी चाहिए होती है। इस आईपीएल से इन युवा तेज़ गेंदबाज़ों को वह मैच प्रैक्टिस मिल रही है। वे सीनियर्स के साथ समय बिता रहे हैं और उनके अनुभवों से भी सीख रहे हैं।इस दौरान उन्होंने गुजरात के यश दयाल और साथ में अभ्यास कर चुके लखनऊ सुपर जायंट्स के मोहसिन ख़ान की भी तारीफ़ की।
ख़ुद के प्रदर्शन और सफ़ेद गेंद क्रिकेट में अपने भविष्य के बारे में बात करते हुए शमी ने कहा, जब-जब मुझे सफ़ेद गेंद की क्रिकेट में मौक़ा मिला है मैंने अपना 100 प्रतिशत देने की कोशिश की है और मैं सफल भी हुआ हूं। पिछले तीन-चार आईपीएल सीजऩ से मैं सबसे अधिक विकेट लेने वाले गेंदबाज़ों में से हूं।
शमी पर हमेशा यह सवाल उठते हैं कि वह टी20 मैचों में विकेट तो लेते हैं लेकिन काफ़ी रन भी ख़र्च कर देते हैं। पिछले साल हुए टी20 विश्व कप के दौरान उन्होंने पांच मैचों में 23.33 की औसत और 15.8 के स्ट्राइक रेट से छह विकेट लिए थे, लेकिन इस दौरान उनकी इकॉनमी 8.84 की रही थी। इसके बाद से उन्हें भारत की तरफ़ से सीमित ओवर क्रिकेट में नहीं देखा गया है। अगर शमी के टी20 अंतर्राष्ट्रीय करियर की बात की जाए तो वह 9.54 की इकॉनमी से रन देते हैं, वहीं आईपीएल में भी उनकी करियर इकॉनमी 8.52 की रही है। हालांकि पिछले दो सीजऩ से उन्होंने इसे सुधारते हुए क्रमश: 7.50 (2021) और 7.87 (2022) किया है।
इस पर शमी ने कहा, मैं टी20 क्रिकेट में इकॉनमी को अधिक तवज्जो नहीं देता हूं। जब आप इकॉनमी की बात करते हैं, तो आपको यह भी देखना चाहिए कि कोई गेंदबाज़ कब आकर गेंदबाज़ी कर रहा है। अगर कोई गेंदबाज़ पावरप्ले या अंतिम ओवरों में गेंदबाज़ी करता है, तो निश्चित रुप से उसकी इकॉनमी अधिक होगी। लेकिन इसके साथ वह आपको विकेट भी दिलाता है, जो टीम के लिए बहुत ज़रूरी है। हां, आप बहुत महंगे नहीं हो सकते हैं और आपको हमेशा नियंत्रण में ही गेंदबाज़ी करनी चाहिए।
गुजरात के प्लेऑफ़ में पहुंचने वाली पहली टीम बनने पर शमी ने कहा कि कोच आशीष नेहरा और कप्तान हार्दिक पंड्या ने इस नई टीम को बख़ूबी संभाला है और हर एक खिलाड़ी से जाकर व्यक्तिगत रूप से बात करते हुए उनसे उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन बाहर निकालते हैं।
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(मुंबई)इंग्लैंड की टेस्ट टीम को फ़र्श से उठाना असली चुनौती : मैकुलम
मुम्बई । इंग्लैंड के नए टेस्ट कोच ब्रेंडन मैकुलम ने कहा है कि सफ़ेद गेंद टीमों को संभालने के आरामदेय काम से इतर उन्होंने इंग्लैंड टेस्ट क्रिकेट को फ़र्श से उभारने की जि़म्मेदारी को पसंद किया। मैकुलम के नियुक्ति की घोषणा की गई और वह कोलकाता नाइट राइडर्स के आईपीएल अभियान की समाप्ति के तुरंत बाद न्यूज़ीलैंड के खिलाफ़ 2 जून से होने वाली सीरीज़ से पहले टीम के साथ जुड़ जाएंगे।
उन्होंने कहा, मैंने दोनों भूमिकाओं को देखा लेकिन सफ़ेद गेंद के कोच की भूमिका मुझे रास नहीं आई। इन प्रारूपों में इंग्लैंड शायद दुनिया की सर्वश्रेष्ठ टीम है और वहां मेरे अच्छे दोस्त ओएन मॉर्गन ने बहुत बढिय़ा सिस्टम बनाया है, जो मुझे लगता है कि उनके बाद भी अच्छे से चलती रहेगी। मेरे लिए ऐसी आरामदेय काम में कोई दिलचस्पी नहीं थी। मुझे हमेशा लगता है कि अगर आप अपने जीवन में कुछ बदलना चाहते हैं तो आपको कुछ ज़्यादा संघर्षपूर्ण चुनौती की ज़रूरत होती है। फि़लहाल इंग्लैंड की टेस्ट टीम फ़र्श पर है और इसे आने वाले वक़्त में एक सफल टीम बनाने में ही असली चुनौती दिखी।
मैकुलम ने यह भी माना कि अपने पिछले 17 में सिफऱ् एक टेस्ट जीते हुए इंग्लैंड को सशक्त बनाना टेस्ट फ़ॉर्मैट के स्वास्थ्य के लिए भी ज़रूरी है। मैकुलम का अनुबंध चार साल का है अर्थात वह 2025-26 में ऑस्ट्रेलिया में होने वाले एशेज तक टीम के साथ होंगे।
उन्होंने कहा, मुझे लगता है टेस्ट क्रिकेट की लोकप्रियता दिन प्रति दिन कम हो रही है। मैं सीमित ओवर की क्रिकेट और फ्ऱैंचाइज़ी क्रिकेट के साथ जुड़े रहने में काफ़ी भाग्यशाली रहा हूं, लेकिन मेरा असली प्यार टेस्ट क्रिकेट ही है। अगर टेस्ट क्रिकेट को कोई देश फिर से आकर्षक और लोकप्रिय बना सकता है तो वह इंग्लैंड ही है। अगर आप चहरे पर मुस्कान लिए एक आकर्षक टेस्ट शैली खेल सकते हैं तो ऐसे में मुझे लगा कि अगर मुझे इस काम के क़ाबिल समझा गया है तो यह मेरे लिए सही है।
मैकुलम बेन स्टोक्स की कप्तानी को कऱीब से देखने के बारे में भी उत्साहित हैं। न्यूज़ीलैंड में जन्मे स्टोक्स और अपने हमवतन होने के बारे में मज़ाक़ करने के बाद वह बोले, जिस प्रकार स्टोक्स अपना क्रिकेट खेलते हैं वह मेरे खेल और कोचिंग शैली से काफ़ी मिलता है। वह स्वच्छंद रूप से विपक्ष पर दबाव डालते हैं। हालांकि लॉर्ड्स टेस्ट का पहला दिन काफ़ी रोचक होगा। लेकिन मज़ा भी आने वाला है।

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