January 20, 2021

गरुड़ लौबाज़ में बकरियों की मौत पर ग्रामीणों ने किया तहसील में प्रदर्शन , 25 किलो की बकरी व 30 किलो के बकरे की जगह दिया गया 15 किलो व 12 किलो की बकरी

बागेश्वर। तहसील के लौबांज क्षेत्र में बकरियों की मौत का मामला गरमा गया है। लौबांज क्षेत्र के ग्रामीणों व पशुपालकों ने तहसील पर प्रदर्शन कर आजीविका के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने और पूरे कार्यो की जांच करने की मांग की। मांग पूरी न होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी।
मंगलवार को तहसील परिसर में प्रदर्शन करते हुए ग्रामीणों ने कहा कि अब तक क्षेत्र में 45 बकरियों की मौत हो गई है। अन्य पशु भी बीमार हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में दहशत फैल गई है। उन्होंने कहा कि श्यामा प्रसाद मुखर्जी रुरबन मिशन योजना के तहत लौबांज क्षेत्र के 180 गरीब परिवारों का चयन किया गया था। 17 लाख 40 हजार की लागत से जौनपुर से बकरियां यहां लाई गई थीं। एक माह पूर्व ही बकरियां गरीब परिवारों को दी गई। ग्रामीणों का आरोप है कि आजीविका ने उन्हें बिना क्वारंटाइन किए ही गरीबों को बीमार बकरियां थमा दी, जिससे पूरे क्षेत्र के पशुओं में संक्रमण फैल गया है। उन्होंने आजीविका के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने और प्रभावित पशुपालकों को शीघ्र मुआवजा दिए जाने की मांग की। इस अवसर पर कौसानी की जिला पंचायत सदस्य सुनीता आर्या, सामाजिक कार्यकर्ता एडवोकेट जेसी, लौबांज के ग्राम प्रधान मनोहर अलमिया, हेमा देवी, कमला देवी, मीरा देवी, बलवंत कुमार, प्रमोद कुमार, राम प्रसाद, देवकी देवी, भागुली देवी आदि मौजूद थे।
आइएलएसपी के प्रबंधक मौके से फरार: विकासखंड मुयालय पहुंचे आइएलएसपी के प्रबंधक राहुल मिश्रा से जब ग्राम प्रधान मनोहर अलमिया व अन्य पशुपालकों ने गांव में चलने को कहा तो वे तैयार हो गए। ग्राम प्रधान मनोहर अलमिया, क्षेपंस भोला दत्त तिवारी, शंकर दत्त जोशी ने बताया कि भोजगण के बाद राहुल मिश्रा कौसानी होते हुए मौके से फरार हो गए और गांवों में नहीं आए।
ग्रामीणों ने कहा कि मानक के अनुसार उन्हें 25 किलो की बकरी व 30 किलो का बकरा दिया जाना था। आजीविका ने गरीब परिवारों को मानकों को ताक पर रखकर मात्र 15 किलो का बकरा व 12 किलो की बकरी थमा दी।

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