भारत के कश्मीर दांव से चित पाक

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आखरीआंख
पाकिस्तान सरकार इस समय पूरे दबाव में है। अनुछेद 370 निरस्त करने और जमू-कश्मीर, लदाख को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बदलने की कल्पना पाकिस्तान ने नहीं की थी। इसे सूंघने में पाक इंटेलीजेंस पूरी तरह से विफल रहा है। देशव्यापी प्रदर्शन व रैलियों ने इमरान की पार्टी पीटीआई के लिए सांप-छछूंदर वाली स्थिति पैदा कर दी है। सदन में इमरान विपक्षी नेता शाहबाज़ शरीफ पर भड़क गये। बोले, ‘आप क्या चाहते हैं, भारत पर हमला कर दें Ó इमरान ने कहा कि एक और पुलवामा संभव है, और वे हम पर दोषारोपण करेंगे। पाकिस्तान की उमीदों से उलट नई दिल्ली में यूएई के राजदूत डॉ. अहमद अल बन्ना ने बयान दिया है कि कश्मीर और लद्दाख में आर्थिक-सामाजिक हालात आने वाले दिनों में और बेहतर होंगे। संयुक्त अरब अमीरात की सोच वाले कई मुसलमान देश भारत के पक्ष में आ रहे हैं, जिससे पाकिस्तान हतोत्साहित है।
इससे पहले, पाक विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी मंगलवार को जेद्दा पहुंच गये थे, जहां 57 सदस्यीय मुसलमान देशों का संगठन आर्गेनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन (ओआईसी) का मुयालय है। जेद्दा में कुरैशी का शिगूफा था, ‘दक्षिण एशिया में इस्लाम और डेढ़ अरब मुस्लिम आबादी ख़तरे में है।Ó मुसलमान देश भी समझते हैं कि पाकिस्तान कश्मीर के मूल मुद्दे को धार्मिक रंग क्यों देना चाहता है। पाकिस्तान कश्मीर पर ओआईसी की आपात बैठक चाह रहा था। यह कार्ड नहीं चला तो संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की इमरजेंसी मीटिंग का गुब्बारा फुलाया गया है। पाकिस्तान की मानवाधिकार मंत्री शीरीन मज़ारी ने सदन को बताया कि हमने यूएन सुरक्षा परिषद के प्रेसिडेंट और संयुक्त राष्ट्र के महासचिव अंटोनियो गुटेरस को भी इमरजेंसी मीटिंग बुलाने के वास्ते पत्र लिखा है। न्यूयार्क में एंबेसडर मलीहा लोधी को इस वास्ते सक्रिय किया गया है। मज़ारी ने सदन में सवाल किया कि जमू-कश्मीर के मुसलमानों पर ज़ुल्म होते ओआईसी कैसे देख सकता है इस बयान से ही बात समझ में आ रही है कि पाक विदेशमंत्री कुरैशी ज़ेद्दा से ख़ाली हाथ लौटे हैं।
यों, 4 अगस्त को ‘ओआईसीÓ ने बयान जारी कर दिया था कि भारत अंतरराष्ट्रीय समुदाय के ज़रिये कश्मीर का शांतिपूर्ण हल निकाले। ‘ओआईसी जनरल सेक्रेटेरियटÓ ने कश्मीर में अर्द्धसैनिक सुरक्षा बलों की बढ़ाई गई संया पर भी चिंता व्यक्त की है। ऐसे मातमी वक्त में इमरान ख़ान ने तुर्की के राष्ट्रपति रिसेप तैयप एर्दोआन और मलेशिया के प्रधानमंत्री महाथिर मोहमद से अपनी वेदना साझा की। दोनों से आश्वासन के सिवा कुछ हासिल नहीं हुआ है। ‘हम स्थिति को देख रहे हैं, पाकिस्तान को सपोर्ट करेंगे।Ó पाक मीडिया की मानिये तो दोनों शासन प्रमुखों से इन्हीं शब्दों का भरोसा मिला है।
सोमवार से बुधवार दोपहर तक 72 घंटे की कड़ी कूटनीतिक मेहनत का नताइज़ जब कुछ न निकला तो स्वाभाविक था कि पाकिस्तान अपनी कुंठा के चरम पर पहुंचता। भारत से व्यापारिक संबंध तोडऩा, हवाई मार्ग को फिर से अवरुद्ध कर देना, अपने उचायुक्त को नई दिल्ली नहीं भेजने का फैसला लेना और हमारे हाई कमिश्नर अजय बिसारिया को इस्लामाबाद से निष्कासित कर देना, इसकी अपेक्षा मोदी सरकार पहले से कर रही थी। हम तो मानसिक रूप से तैयार थे कि बौखलाया पाकिस्तान ऐसा कर सकता है।
इसमें हैरत वाली कोई बात नहीं कि पाकिस्तान के वज़ीरे आज़म की हरकत बचे जैसी होने लगी है। आपने व्यापार समझौता भारत से सस्पेंड कर दिया। बता भी दीजिए, उभयप़क्षीय व्यापार कितने अरब डॉलर का हो रहा था वर्ल्ड बैंक ने 25 सितंबर 2018 को जानकारी दी थी कि भारत-पाक के बीच मात्र दो अरब डॉलर का सालाना व्यापार हो रहा है, जबकि दोनों देश चाहते तो सालाना व्यापार 37 अरब डॉलर तक ले जा सकते थे। आज की तारीख़ में विदेशी मुद्रा से लबालब भारत के खज़ाने से एक-डेढ़ अरब डॉलर कम भी पड़ जायें तो क्या फ़र्क पड़ता है मगर, इस आत्मधाती कद़म से इमरान के न्यू पाकिस्तान के लुढ़कते, लंगड़ाते व्यापार जगत का तो भट्टा बैठ जाना है।
पाकिस्तान ने बालाकोट सर्जिकल स्ट्राइक के बाद 26 फरवरी 2019 से 2 जुलाई तक एयर रूट को बंद कर रखा था। 3 जुलाई को नागरिक उड्डयन मंत्री हरदीप पुरी ने रायसभा को जानकारी दी थी कि इस कारण हमारी विमान कंपनियों को रूट में बदलाव करने पड़े थे, जिससे हमें 491 करोड़ का नुकसान उठाना पड़ा था। कुल मिलाकर 126 दिनों में भारत का इतना आर्थिक नुकसान हुआ। यही वो जगह है जहां पाकिस्तान, भारत को आर्थिक चोट पहुंचाने की स्थिति में है।
मगर, भारत ठान ले तो पाकिस्तान को प्रदत्त जलधारा से छेड़छाड़ कर ही सकता है। यह सच है कि सिंधु, झेलम और चेनाब की जलधारा मोडऩे के वास्ते नहरें, अधोसंरचना तैयार करने में कई लाख करोड़ और सात से दस साल का समय लग सकता है। जब पाकिस्तान आकाश मार्ग को अवरुद्ध कर सकता है तो भारत जल मार्ग को क्यों नहीं मोड़ सकता तर्क करने वाले कर सकते हैं कि सतलुज, रावी और ब्यास के साथ पाक भी ऐसा करे, फिर क्या होगा वैसे भी भारत रावी और ब्यास की जल धाराओं का लाभ रायों में विवाद की वजह से नहीं उठा पाता। भारत ऐसा क़दम उठाने से पहले पुता इंतज़ाम अवश्य चाहेगा। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान और दिल्ली के मुयमंत्रियों के बीच सिंधु जल के इस्तेमाल के सहमति पत्र पर हस्ताक्षर कराके इस दिशा में आगे बढ़ाने का संकेत तो दिया है। रावी नदी की एक शाखा ‘उझÓ की धारा को मोडऩे वाली महत्वाकांक्षी परियोजना पर भी कश्मीर के गवर्नर ने हरी झंडी दे रखी है।
कश्मीर के बहाने नवाज़ शरीफ की पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग पुनर्जीवित होना चाहती है। मगर, असल खेल जमाते इस्लामी ने खेलना शुरू किया है। मुल्तान, गुजरांवाला, फैसलाबाद, सरगोधा, पेशावर, कोहाट, मरदान, डेरा इस्माइल ख़ान, खार, मीरपुर, कलाया, हांगू, मुजफ़राबाद, रावलकोट, झेलम घाटी में रैलियों का सिलसिला जमाते इस्लामी ने जिस तरह शुरू किया है, उसके आगे इमरान ख़ान की पार्टी ‘पाकिस्तान तहरीके इंसाफÓ भी फीकी पड़ चुकी है। जमाते इस्लामी के नेता सीनेटर सिराजुल हक़, सेक्रेटरी जनरल अमीरूल अज़ीम के बयानों से स्पष्ट हुआ है कि जमाते इस्लामी पाकिस्तान में ‘कश्मीर की निर्वासित सरकारÓ का प्रस्ताव रखना चाहती है। एजेंडा यह है कि ऐसी निर्वासित सरकार पीओके में निर्मित हो। सीमा पार से तथाकथित रूप से सताये लोग और अलगाववादी नेता कश्मीर की निर्वासित सरकार में शरीक हो जाएं। उधर से ही नारा-ए-तकबीर लगाएं। मगर, इसके लिए पाकिस्तान पैसा और संसाधन कहां से जुटाएगा इन चक्करों में कहीं ‘ग़ुलाम कश्मीरÓ भी पाकिस्तान के हाथ से न निकल जाए!
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